Friday, October 5, 2018

मनमर्जी का मालिक जनसेवक


मारे देश में अगर किसी भी नागरिक को कोई समस्या आती है तो वह सबसे पहले सम्बंधित जन सेवक को याद करता है। फिर उक्त समस्या के निराकरण करने के लिए गुहार लगाता है लेकिन अधिकांश लोगों की आज भी सुनवाई नही होती है। चूंकि पारंपरिक रूप से चली आ रही जनता के सेवको की कहानियों से हमसब भलीभांति परिचित है। और आखिर क्यों न हो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हमारे पास जो है। जो हमें हमेशा जनसेवकों की गतिविधियों से अवगत कराता रहता है। बावजूद इसके आज भी जानता अपनी समस्याओं को लेकर जनसेवकों के समक्ष गिड़गिड़ा रही है। जिसका उदाहरण अक्सर शासकीय कार्यालयों या जनप्रतिनिधि कार्यालयों तथा पुलिस थानों आदि में देखा जा सकता है। जहां पर कर्मचारी वर्ग से लेकर अधिकारी वर्ग तक सब अपने मन मुताबिक काम करते है।